ओवरटाइम, बोनस और चार अतिरिक्त दिन… शराब दुकानों के कर्मचारियों के नाम पर कैसे हुआ कथित भुगतान खेल? मैनपावर भुगतान घोटाले में पूरक चालान पेश
EOW-ACB की जांच में कमीशन नेटवर्क का दावा | कर्मचारियों के नाम पर भुगतान, ओवरटाइम-बोनस की रकम और आंगड़िया कनेक्शन की पड़ताल

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में मैनपावर भुगतान का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। सरकारी शराब दुकानों में कर्मचारियों की तैनाती के नाम पर हुए कथित 182.98 करोड़ रुपये के अतिरिक्त भुगतान को लेकर आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने जांच का दायरा आगे बढ़ाया है। जांच एजेंसी ने CSMCL के तत्कालीन प्रबंध संचालक अरुणपति त्रिपाठी और मैनपावर एजेंसी संचालक बीआर लोहिया के खिलाफ विशेष न्यायालय, रायपुर में पूरक चालान पेश किया है।
जांच एजेंसी के आरोपों के मुताबिक, इस पूरे मामले में कर्मचारियों के ओवरटाइम, बोनस और चार अतिरिक्त दिनों के काम के नाम पर भुगतान दर्शाया गया, लेकिन संबंधित कर्मचारियों तक पूरी रकम पहुंचने के बजाय एजेंसियों को अतिरिक्त भुगतान किए जाने का कथित खेल चला। अब जांच में सामने आए भुगतान के आंकड़े, कमीशन के आरोप और नकदी को अलग-अलग शहरों तक पहुंचाने के कथित नेटवर्क ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
182 करोड़ का भुगतान, लेकिन कर्मचारियों को पैसा मिला या नहीं?
EOW/ACB की जांच का केंद्रीय आरोप यही है कि शासकीय शराब दुकानों में काम करने वाले कर्मचारियों के नाम पर पांच मैनपावर एजेंसियों को अतिरिक्त भुगतान कराया गया। एजेंसी के मुताबिक, फर्जी भुगतान अभिलेखों के जरिए ओवरटाइम, बोनस और चार अतिरिक्त दिनों के काम की रकम का हिसाब दिखाया गया, जबकि कर्मचारियों को उसका वास्तविक भुगतान नहीं किया गया।
इस मामले में जांच एजेंसी पहले ही नवीन प्रताप सिंह तोमर, अनवर ढेबर और विभिन्न मैनपावर एजेंसियों के संचालकों सहित 12 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश कर चुकी है। अब अरुणपति त्रिपाठी और बीआर लोहिया के खिलाफ पूरक चालान के जरिए जांच के निष्कर्षों को अदालत के सामने रखा गया है।
त्रिपाठी के कार्यकाल में 152.40 करोड़ के अतिरिक्त भुगतान का आरोप
जांच एजेंसी के मुताबिक, अरुणपति त्रिपाठी 9 मई 2019 से 13 मई 2023 तक छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) के प्रबंध संचालक रहे। इस दौरान उनके पास प्रशासनिक, वित्तीय और निविदा संबंधी अधिकार थे।
EOW/ACB का आरोप है कि अनवर ढेबर के कहने पर निविदा की शर्तों में बदलाव किया गया और कर्मचारियों के नाम पर अतिरिक्त भुगतान की व्यवस्था बनाई गई। एजेंसी के अनुसार, त्रिपाठी के कार्यकाल में पांच मैनपावर एजेंसियों को करीब 152.40 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया।
इस रकम में लगभग 82.66 करोड़ रुपये ओवरटाइम, 12.21 करोड़ रुपये बोनस, 45.02 करोड़ रुपये चार अतिरिक्त दिनों के काम और 12.51 करोड़ रुपये सेवा शुल्क के नाम पर शामिल बताए गए हैं।
हर महीने 70 से 80 लाख रुपये कमीशन आने का दावा
इस मामले का सबसे गंभीर पहलू कथित कमीशन नेटवर्क है। जांच एजेंसी के अनुसार, सिद्धार्थ सिंघानिया मैनपावर एजेंसियों से नकद कमीशन जुटाकर त्रिपाठी तक पहुंचाता था। एजेंसी का दावा है कि पांचों एजेंसियों से मिलाकर हर महीने करीब 70 से 80 लाख रुपये कमीशन आता था।
EOW/ACB के मुताबिक, त्रिपाठी ने कथित तौर पर 28 से 32 करोड़ रुपये नकद कमीशन प्राप्त कर अनवर ढेबर तक पहुंचाए। एजेंसी ने यह भी बताया है कि इस कथित अवैध रकम में से करीब तीन करोड़ रुपये ED द्वारा जब्त किए गए थे। त्रिपाठी फिलहाल न्यायिक अभिरक्षा में हैं।
इन आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत में साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
बीआर लोहिया की दो कंपनियों को मिले 48 करोड़ रुपये से ज्यादा
जांच में बीआर लोहिया की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। EOW/ACB के अनुसार, लोहिया ईगल हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड के संस्थापक थे और अलर्ट कमांडोज प्राइवेट लिमिटेड भी इसी समूह की कंपनी थी।
एजेंसी का आरोप है कि लोहिया के निर्देश पर कंपनी के चार्टर्ड अकाउंटेंट नीरज चौधरी ने कर्मचारियों के ओवरटाइम और चार अतिरिक्त दिनों के काम के बिल जारी किए, जबकि कर्मचारियों को संबंधित रकम का वास्तविक भुगतान नहीं किया गया।
जांच के अनुसार:
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ईगल हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड: लगभग 33.45 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान।
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अलर्ट कमांडोज प्राइवेट लिमिटेड: लगभग 14.63 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान।
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दोनों कंपनियों को कुल भुगतान: करीब 48.09 करोड़ रुपये।
इसमें से लगभग 38.32 करोड़ रुपये अरुणपति त्रिपाठी के कार्यकाल के दौरान दिए जाने का दावा किया गया है।
29.40 लाख के चेक से लेकर 28.80 लाख की बरामदगी तक
जांच एजेंसी ने 29 नवंबर 2023 की एक घटना का भी उल्लेख किया है। उसके मुताबिक, लंबित बिल पारित कराने के एवज में तत्कालीन उप महाप्रबंधक नवीन प्रताप सिंह तोमर को देने के लिए दिल्ली से 29.40 लाख रुपये का चेक भेजा गया था।
एजेंसी का दावा है कि बैंक से रकम निकालने के बाद 60 हजार रुपये खर्च किए गए और शेष 28.80 लाख रुपये कथित कमीशन के रूप में पहुंचाए जा रहे थे। ED की कार्रवाई के दौरान यह रकम बरामद होने की बात भी जांच विवरण में कही गई है।
EOW/ACB के मुताबिक, बीआर लोहिया को पूछताछ के लिए कई बार नोटिस दिए गए, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद उनके खिलाफ फरारी पंचनामा तैयार कर फरारी की स्थिति में पूरक चालान पेश किया गया।
आंगड़िया नेटवर्क से 60-70 करोड़ रुपये भेजने का आरोप
जांच में नकदी को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के कथित नेटवर्क का भी उल्लेख है। एजेंसी के अनुसार, महमूद अहमद खान ने 2019 से 2022 के बीच पी. विजय कंपनी तक लगभग 60 से 70 करोड़ रुपये नकद पहुंचाए थे। जांच में इस रकम को अरुणपति त्रिपाठी से जुड़ा बताया गया है।
EOW/ACB के अनुसार, पी. विजय कुमार एंड कंपनी के तत्कालीन पार्टनर निमेष चन्द्रकान्त पटेल ने रकम मुंबई स्थित श्रीजी इंटरप्राइजेज तक पहुंचाने और वहां से आगे हैदराबाद भेजे जाने की पुष्टि की है।
जांच के घेरे में पांच मैनपावर एजेंसियां
इस मामले में जिन पांच एजेंसियों का नाम जांच विवरण में आया है, वे हैं:
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सुमीत फैसिलिटीज लिमिटेड
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प्राइमवन वर्कफोर्स प्राइवेट लिमिटेड
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ए-टू-जेड इन्फ्रासर्विसेस लिमिटेड
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अलर्ट कमांडोज प्राइवेट लिमिटेड
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ईगल हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड
अब इस मामले में नजर अदालत की कार्यवाही पर रहेगी। जांच एजेंसी के आरोपों और पूरक चालान में सामने रखे गए तथ्यों की न्यायिक जांच के बाद ही आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष निकलेगा।
